उसे समुंदर पसंद और मुझे पहाड़...
उसे उगता हुआ सूरज, मुझे ढलती हुई "सांझ"....
उसे बारिश से चिढ़ ,मुझे भीगने से प्यार ..
उसे धूल से नफरत, मेरा मिट्टी से जुड़ाव...
वो शांत गंभीर मैं उतनी ही वाचाल...
सब कुछ तो अलग है , फिर भी है साथ ...
क्या इसी को कहते है प्यार ....
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