सांझ है ठहरी हुई ,सुबह है थोड़ी बाकी ..
ओट से झांके जब चाँद, बादल हुए गुलाबी ...
नभ का ये नज़ारा देख ,चंपा रही खिलखिलाती ...
महक उठा सारा मंज़र ,चदनियाँ गीत गाती ...😊😊😊
No comments:
Post a Comment